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Foundation Depth Kya Hota hai? Foundation Depth Kitni Honi chaiye

 परिचय (introduction) किसी भी मकान या building का निर्माण करते समय सबसे महत्वपूर्ण काम उसकी नींव (foundation) बनाना होता हैं नींव पूरी बिल्डिंग का load जमीन तक पहुंचाने का काम करती हैं अगर वही नींव सही तरीके से नहीं बनाया जाए तो भविष्य में दीवारों में दरारें फर्श का धंसना और building में अन्य समस्याएं हो सकती हैं  Foundation बनाते समय एक महत्वपूर्ण बात पर ध्यान देना जरूरी होता हैं जिसे foundation Depth या foundation की गहराई कहा जाता हैं founddation depth का सही चुनाव की स्थिति बिल्डिंग के लोड और जमीन की मजबूती के आधार पर किया जाता हैं  इस लेख में हम जानेंगे की foundation depth क्या होती हैं इसकी गहराई कैसे तय की जाती हैं और foundation बनाते समय किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए  Foundation depth क्या होती हैं? Foundation depth का मतलब हिंदी में नींव की गहराई होता हैं जमीन की सतह से नींव सबसे निचले हिस्से से सबसे ऊपर तक सामान्य रूप से foundation depth कहा जाता हैं  उदाहरण: जमीन की सतह से खुदाई करके नींव का निचला स्तर 2M नीचे बनाया जाता हैं तो उस स्तर की गहराई 2M...

Isolated Footing

एकल फुटिंग Isolated footing वह नींव होती हैं जो सामान्यतः एकल कॉलम को सहारा देने के लिए बनाई जाती हैं कॉलम के नीचे फुटिंग का आकार कॉलम के आकार बड़ा रखा जाता हैं ताकि कॉलम का भार जमीन के अधिक क्षेत्र में फेल सके इससे जमीन पर पड़ने वाले कम करने में मदद मिलती हैं जिससे भवन को स्थिरता मिलती हैं 

Isolated footing civil engineering work

एकल फुटिंग का क्या काम होता हैं?

एकल फुटिंग का निम्न काम होता हैं -

• कॉलम का भार जमीन तक पहुंचाना| 
• भवन के भार को जमीन के बड़े क्षेत्र में फैलाना |
• जमीन पर अधिक दबाव पड़ने से बचाना| 
• कॉलम मजबूत आधार देना|
• भवन की स्थिरता बनाए रखना|

एकल फुटिंग का उपयोग कहा किया जाता हैं?

एकल फुटिंग का उपयोग उन जगहों पर किया जाता है जहां कॉलम एक दूसरे से उचित दुरी पर हो और प्रत्येक कॉलम के लिए अलग नींव देना संभव होता हैं /
इसका उपयोग घर, छोटे भवन और अन्य संरचनाओं में किया जाता हैं 

एकल फुटिंग के प्रकार?

Isolated footing ke prakar in civil engineering

वर्गाकार फुटिंग ?

इस प्रकार की फुटिंग का आकार सामान्यतः वर्गाकार होता हैं जब परिस्थितियां उपयुक्त हो तो इसका कॉलम के नीचे किया जाता हैं


आयताकार फुटिंग?

इस फुटिंग का आकार आयताकार होता हैं इसका उपयोग जगह भार और स्थिति के अनुसार किया जाता हैं 

स्टेप फुटिंग?

इस प्रकार की फुटिंग में फुटिंग को सीढ़ीनुमा में बनाया जाता हैं इसका डिजाइन संरचनात्मक आवश्यकतानुसार बनाया जाता हैं 

ढलानदार फुटिंग?

इस प्रकार की फुटिंग में फुटिंग की मोटाई किनारों और कम और आवश्यकतानुसार बीच की और अधिक होता हैं 

एकल फुटिंग में कौन-कौन से सामग्री लगती हैं?

एकल फुटिंग में निम्न सामग्री का उपयोग होता हैं -

• सीमेंट 
• रेत (बालू)
• गिट्टी 
• पानी 
• सरिया 
• कंक्रीट 
• फाइंडिंग वायर 
• शटरिंग सामग्री 
सामग्री की मात्रा इंजीनियर के अनुसार तय किया जाना चाहिए 

एकल फुटिंग बनाने की प्रक्रिया?

जगह की माप और निशान लगाना 

सबसे पहले नक्शे के अनुसार कॉलम और फुटिंग की जगह की माप करके निशान लगाया जाता हैं 

खुदाई?


निशान के अनुसार निर्धारित लंबाई-चौड़ाई और गहराई तक खुदाई की जाती हैं 

पीसीसी करना?

खुदाई के बाद नीचे पीसीसी की परत बनाई जाती हैं

पीसीसी के बारे में जानकारी के लिए लिंक पर क्लिक करें 


सरिया लगाना?

डिजाइन के अनुसार सरिया लगाया जाता है सरिया लगाते समय कवर बनाए रखना जरूरी है 

कंक्रीट डालना?

फुटिंग में निर्धारित गुणवत्ता का कंक्रीट डाला जाता हैं और कंक्रीट को अच्छी तरह से कॉम्पैक्ट किया जाता हैं 

पानी देना?

कंक्रीट डालने के बाद सही समय पर पानी दी जाती हैं जिससे कंक्रीट को मजबूती मिलती हैं 

एकल फुटिंग के फायदे?

एकल फुटिंग के प्रमुख फायदे -
• एक कॉलम के लिए अलग आधार मिलता है 
• निर्माण प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल हो सकती हैं 
• उचित डिजाइन होने पर यह प्रभावी नींव प्रणाली 

एकल फुटिंग का आकार कैसे तय किया जाता हैं?

फुटिंग का आकार निम्न बातों को ध्यान में रखकर तय किया जाता हैं -
• कॉलम का भार 
• मिट्टी की भार सहने की क्षमता 
• भवन की कूल भार 
• फुटिंग की गहराई 
• कंक्रीट की गुणवत्ता 
• जमीन की स्थिति 
इसलिए वास्तविक फुटिंग का आकार मोटाई और सरिया की मात्रा संरचनात्मक इंजीनियर के डिजाइन के अनुसार तय करनी चाहिए 

निष्कर्ष:

एकल फुटिंग Isolated footing  भवन की नींव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है इसका मुख्य काम कॉलम के भार को सुरक्षित रुप से जमीन तक पहुंचाना 

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