परिचय (introduction) किसी भी मकान या building का निर्माण करते समय सबसे महत्वपूर्ण काम उसकी नींव (foundation) बनाना होता हैं नींव पूरी बिल्डिंग का load जमीन तक पहुंचाने का काम करती हैं अगर वही नींव सही तरीके से नहीं बनाया जाए तो भविष्य में दीवारों में दरारें फर्श का धंसना और building में अन्य समस्याएं हो सकती हैं Foundation बनाते समय एक महत्वपूर्ण बात पर ध्यान देना जरूरी होता हैं जिसे foundation Depth या foundation की गहराई कहा जाता हैं founddation depth का सही चुनाव की स्थिति बिल्डिंग के लोड और जमीन की मजबूती के आधार पर किया जाता हैं इस लेख में हम जानेंगे की foundation depth क्या होती हैं इसकी गहराई कैसे तय की जाती हैं और foundation बनाते समय किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए Foundation depth क्या होती हैं? Foundation depth का मतलब हिंदी में नींव की गहराई होता हैं जमीन की सतह से नींव सबसे निचले हिस्से से सबसे ऊपर तक सामान्य रूप से foundation depth कहा जाता हैं उदाहरण: जमीन की सतह से खुदाई करके नींव का निचला स्तर 2M नीचे बनाया जाता हैं तो उस स्तर की गहराई 2M...
Construction Work का मतलब घर बनाना, इमारतें, पुल, सड़क स्कूल, अस्पताल कारखाना बनाने की प्रक्रिया को निर्माण काम कहते हैं जिसमें जमीन की तैयारी से लेकर नींव, दीवार,छत , फर्श के काम किए जाते हैं Construction Work में इंजीनियर मिस्त्री ठेकेदार मजदूर मिलकर काम करते हैं किसी काम को मजबूत और सुरक्षित बनाने के लिए सही योजना अच्छी सामग्री और अच्छे मजदूर की जरूरत होती हैं
Construction Work ke Pramukh Prakar?
• भवन निर्माण- इसमें घर दुकान कार्यालय स्कूल अस्पताल होटल और बहुमंजिला बनाने की प्रक्रिया को भवन निर्माण कहते हैं
• सड़क निर्माण - एक जगह से दुसरे जगह जोड़ने के लिए सड़क का निर्माण किया जाता है सड़क बनाने से पहले जमीन को तैयार किया जाता है इसके बाद मिट्टी की भराई की जाती है और उसके बाद सड़क बनाया जाता है इसे सड़क निर्माण कहा जाता है
• पुल का निर्माण - नदी नाला रेलवे लाइन या किसी अन्य बांध के ऊपर आने जाने के लिए पुल बनाया जाता है है पुल का निर्माण बहुत सावधानी और इंजीनियरिंग के अनुसार किया जाता है
• निर्माण कार्य की प्रक्रिया?
किसी भी काम को कई चरणों में पुरा किया जाता है
• योजना बनाना - निर्माण कार्य शुरू करने से पहले पूरी योजना तैयार किया जाता है इसमें यह तय किया जाता है कि क्या बनाना है कितनी जगह चाहिए और घर या इमारत के लिए नक्शा तैयार किया जाता है
• जमीन की जांच - निर्माण काम शुरू करने से पहले जमीन की स्थिति देखी जाती है मजबूती,ढलान, ऊंचाई जैसे चीजों की जांच की जाती है बड़े निर्माण काम में मिट्टी की भी जांच की जाती हैं
• नींव का निर्माण - नींव किसी भी भवन और इमारत का बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं भवन का वजन नींव के माध्यम से से जमीन तक पहुंचाता है नींव में स्टील और कंक्रीट का उपयोग किया जाता हैं नींव का आकार,साइज इंजीनियर के डिजाइन के अनुसार तय किया जाता हैं
• खंभे का निर्माण - नींव के बाद खंभों का निर्माण किया जाता हैं खंभे के माध्यम से भवन का वजन नींव तक पहुंचाता हैं खंभा बनाने में स्टील और कंक्रीट का उपयोग किया जाता हैं
• बीम का निर्माण - बीम भवन के वजन को सहारा देने वाले महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक है बीम को खंभों के बीच बनाया जाता हैं
• दीवार का निर्माण - भवन की बाहरी और अंदर की और दीवार बनाने के लिए ईंट ,कंक्रीट या हल्के ब्लॉक जैसे सामान का उपयोग किया जाता हैं दीवार बनाते समय दीवार की ऊंचाई, सीधा का ध्यान रखना जरूरी होती हैं
• छत का निर्माण - भवन या इमारत में छत बनाने के लिए स्टील और कंक्रीट का उपयोग किया जाता हैं छत ढालने से पहले नीचे ढलाई व्यवस्था की जाती हैं और उसके बाद डिजाइन के अनुसार सरिया लगाया जाता है और फिर ढलाई किया जाता हैं
• निर्माण काम में उपयोग होने वाले सामान?
• सीमेंट
• बालू
• गिट्टी
• सरिया
• ईंट
• पानी
• बेंडींग वायर
• निर्माण काम में गुणवत्ता क्यों जरूरी होती हैं?
किसी भवन की मजबूती और लंबे समय तक उपयोग के लिए गुणवत्ता बहुत जरूरी होती हैं ख़राब सामान से या ग़लत तरीके से किया गया निर्माण भविष्य में समस्या पैदा कर सकती हैं इसलिए सीमेंट, ईंट,बालु, गिट्टी जैसे सामान का ध्यान देना चाहिए!




टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें